अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं ने ईरान पर अब तक हजारों लक्ष्यों पर हमले


अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, जिनका उद्देश्य ईरान के सैन्य और मिसाइल ढांचे को नुकसान पहुंचाना था। इसी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़मनेई की हत्या सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इसके बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और बैलेस्टिक मिसाइलों से इलाक़ों में हमला किया, जिसमें इज़राइल, अमेरिका के सैनिक ठिकानों और खाड़ी देशों को निशाना बनाया गया। यह संघर्ष अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों की भारी कार्रवाई जारी है।
ईरान ने घोषणा की है कि वह अमेरिका और इज़राइल के आर्थिक तथा बैंकिंग हितों को लक्ष्य करेगा, अगर वे क्षेत्र में बने रहते हैं। युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सबसे बड़ी रणनीतिक तेल भंडार की रिहाई का प्रस्ताव दिया है ताकि कच्चे तेल की आपूर्ति और मूल्य स्थिर हों। संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मज़, जो दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन का गेटवे है, में नौवहन और तेल टैंकरों के लिए खतरनाक स्थिति बनी है।
लेबनान में इज़राइली हवाई हमलों में कई लोगों की मौत और घायल होने की खबरें मिलीं, जबकि तेहरान ने युद्ध अपराध के आरोप लगाए हैं। अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं ने ईरान पर अब तक हजारों लक्ष्यों पर हमले किए हैं और यह संघर्ष कोई तत्काल शान्ति संकेत नहीं दिखा रहा है।


खाड़ी क्षेत्र की कई एयरलाइंस मिसाइल खतरे के बावजूद धीरे‑धीरे अपनी उड़ानें बढ़ा रही हैं। तेल की आपूर्ति पर संकट के कारण वैश्विक ईंधन मूल्य बढ़ रहे हैं, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। ईरान के एक पैरालिम्पिक खिलाड़ी को युद्ध के कारण प्रतियोगिता में भाग लेने से वंचित होना पड़ा है।
संक्षेप में यह संघर्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष, और सैन्य हमलों के जवाब में बढ़ा है — जिसने इज़राइल और अमेरिका को ईरान के ठिकानों पर विस्तारित सैन्य कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया।

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