होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव: वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बढ़ा खतरा


मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के केंद्र में आ गया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती है ।

Administration के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025 में हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल इस मार्ग से होकर गुज़रा। इसका वार्षिक मूल्य लगभग 600 अरब डॉलर के ऊर्जा व्यापार के बराबर माना जाता है। यह तेल केवल ईरान का नहीं होता, बल्कि खाड़ी के कई बड़े तेल उत्पादक देशों—जैसे Iraq, Kuwait, Qatar, Saudi Arabia और United Arab Emirates—से भी इसी रास्ते से दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है।


अगर जलडमरूमध्य बंद हो जाए तो क्या होगा?


आमतौर पर हर महीने करीब 3,000 जहाज़ इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। लेकिन हालिया संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के कारण कई विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा।
ऊर्जा बाजार पर निगरानी रखने वाली संस्था Global Risk Management के मुख्य विश्लेषक Arne Lohmann Rasmussen का कहना है कि व्यवहारिक तौर पर यह मार्ग लगभग बंद जैसा हो गया है, क्योंकि कई जहाज़ यहां से गुजरने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि इस इलाके में हमले का खतरा बना हुआ है और जहाज़ों का बीमा या तो मिल नहीं रहा या फिर बहुत महंगा हो गया है।
विश्लेषकों के अनुसार, जब तक सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक जहाज़ों को इस मार्ग से गुजरने में जोखिम रहेगा। अगर इस रास्ते से आने वाला तेल और गैस रुक जाता है तो वैश्विक बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती है।


तेल कीमतों में उछाल


युद्ध और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पहले ही तेज़ी देखने को मिल रही है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि बाद में कुछ गिरावट आई। फिर भी संघर्ष से पहले की तुलना में कीमतें अब भी काफी ऊंची बनी हुई हैं।
इस बीच London Stock Exchange Group के आंकड़ों के अनुसार, मध्य पूर्व से चीन तक तेल ले जाने के लिए सुपरटैंकर किराए पर लेने की लागत पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है और बढ़कर 4 लाख डॉलर से अधिक प्रति यात्रा तक पहुंच गई है।


वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर


विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल सामान्य परिस्थितियों में इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसलिए अगर यहां किसी भी तरह की बाधा आती है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कंपनियां इस क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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