वॉशिंगटन/जी-7 शिखर सम्मेलन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ जिस समझौते पर सहमति बनी है, वह अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अब्देल फ़तह अल-सीसी के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान “ठीक तरीके से व्यवहार नहीं करता”, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप ने उन रिपोर्टों का भी खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ईरान के साथ अंतिम समझौते के बदले उसके लिए निवेश कोष (इन्वेस्टमेंट फंड) की अनुमति देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान में कोई निवेश नहीं कर रहा है।
इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने कहा था कि प्रस्तावित समझौते के तहत “ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा।” अमेरिका इस मुद्दे को समझौते की प्रमुख शर्तों में शामिल मानता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर के लिए मिलने वाले हैं। हालांकि, समझौते का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच इस समझौते पर प्रारंभिक सहमति रविवार को पाकिस्तान की मध्यस्थता में बनी थी। इसे ‘समझौता ज्ञापन’ (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का नाम दिया गया है, लेकिन इसके प्रावधानों और शर्तों के बारे में अब तक आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। वहीं, समझौते की अंतिम शर्तों और दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।