कोयंबटूर वन अभयारण्य में हाथियों को बचाने के लिए एआई और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल


कोयंबटूर।

तमिलनाडु के कोयंबटूर वन अभयारण्य में हाथियों को रेलवे ट्रैक के पास आने से रोकने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मानवरहित ड्रोन तकनीक की मदद से एक नई परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य ट्रेनों से होने वाली हाथियों की मौत को रोकना और वन्यजीवों की सुरक्षा बढ़ाना है।
जांच में सामने आया है कि इस परियोजना के तहत ड्रोन कैमरे और निगरानी ड्रोन चौबीसों घंटे रेलवे ट्रैक की निगरानी करते हैं। जैसे ही कोई हाथी रेलवे लाइन के पास आता है, ड्रोन से सायरन बजाकर उसे वहां से दूर भगाने की कोशिश की जाती है ताकि किसी दुर्घटना से बचा जा सके।


केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2010 से 2024 के बीच ट्रेनों से टकराकर 186 हाथियों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पर्यावरण मंत्रालय, रेल मंत्रालय और राज्य वन विभागों द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन में देश की 77 रेलवे लाइनों पर वन्यजीवों की मृत्यु दर काफी अधिक पाई गई है।
अध्ययन में इस समस्या को कम करने के लिए कई ढांचागत सुधारों और तकनीकी उपायों की सिफारिश की गई है। इनमें रेलवे ट्रैक के आसपास निगरानी व्यवस्था मजबूत करना, चेतावनी प्रणाली विकसित करना और ट्रेनों की गति नियंत्रित करना जैसे सुझाव शामिल हैं।
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि तमिलनाडु और केरल की सीमा से लगे वन क्षेत्रों में स्थित दो रेलवे लाइनों पर ट्रेन से टकराने की घटनाओं में हाथियों की बड़ी संख्या में मौत हुई है। वन विभाग के अनुसार तमिलनाडु के एट्टिमाडाई रेलवे स्टेशन और केरल के वलयार रेलवे स्टेशन के बीच करीब 7 किलोमीटर के दायरे में दो रेलवे लाइनें मौजूद हैं।
ये दोनों रेलवे लाइनें मदुक्कराई वन अभयारण्य और चोलक्कराई अभयारण्य के जंगलों को तीन हिस्सों में बांटती हैं, जिसके कारण हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित होते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। नई तकनीक के इस्तेमाल से इस समस्या को कम करने की उम्मीद जताई जा रही है।

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