ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमले के बाद मध्य-पूर्व में शुरू हुए युद्ध का असर अब दुनिया के कई देशों की तरह बांग्लादेश में भी दिखाई देने लगा है। देश में ईंधन की कमी के कारण कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। लोग शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें जरूरत के अनुसार तेल नहीं मिल पा रहा है।
इस संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश को 5,000 मीट्रिक टन डीज़ल की आपूर्ति की है। वहीं बांग्लादेश ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत से अतिरिक्त 50,000 मीट्रिक टन डीज़ल की मांग की है, हालांकि इस पर भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बांग्लादेश की बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के साथ भारत के संबंध परंपरागत रूप से बहुत मजबूत नहीं रहे हैं। हालांकि फरवरी में तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी की सरकार बनने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया था।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस संकट के समय भारत को बांग्लादेश की मदद करते हुए उसे ईंधन, खासकर डीज़ल, की अतिरिक्त आपूर्ति करनी चाहिए। उनका कहना है कि बांग्लादेश पहले ही चीन से भी मदद मांग चुका है और चीन भारत के पड़ोस में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का कोई अवसर शायद ही गंवाएगा।